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विटामिन D की कमी

धूप के बावजूद भारत में विटामिन D की कमी बहुत आम है। इलाज आसान है — पर ज़रूरत से ज़्यादा लेना भी नुक़सानदेह है।

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लक्षण

  • हड्डियों में दर्द — पिंडलियाँ, जाँघें, कमर
  • मांसपेशियों में कमज़ोरी — सीढ़ियाँ चढ़ने या कुर्सी से उठने में कठिनाई
  • थकान, ऐंठन
जोड़ों में सूजन विटामिन D की कमी से नहीं होती। सूजन या लंबी सुबह की जकड़न हो तो दूसरा कारण देखना ज़रूरी है।

जाँच और इलाज

  • जाँच: 25-OH विटामिन D; ज़्यादातर लैब 20 ng/mL से कम को कमी मानती हैं
  • डॉक्टर कुछ हफ़्तों तक ज़्यादा खुराक और फिर कम खुराक देते हैं
  • भोजन से कैल्शियम — दूध, दही, पनीर, रागी, तिल
ज़्यादा लेना ख़तरनाक है। बिना जाँच के बार-बार विटामिन D के बड़े इंजेक्शन या सैशे लेने से कैल्शियम बहुत बढ़ सकता है — उल्टी, भ्रम, किडनी को नुक़सान और पथरी हो सकती है। डॉक्टर के बताए अनुसार ही लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विटामिन D की कमी ठीक होने में कितना समय लगता है?+
स्तर आमतौर पर 6–12 हफ़्तों में बढ़ता है; दर्द कुछ महीनों में कम होता है।
क्या इंजेक्शन गोली से बेहतर है?+
आमतौर पर नहीं। गोली/सैशे ज़्यादातर लोगों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित हैं।

पूरे शरीर में दर्द?

हड्डियों और मांसपेशियों के दर्द के कई कारण होते हैं — सही जाँच ज़रूरी है। बिना अपॉइंटमेंट OPD।

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